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श्री हनुमान पंचक
श्री संकटमोचन हनुमानाष्टक
श्री संकटमोचन हनुमानाष्टक
बाल समय रवि भक्ष लियो तब तीनहुं लो कभयो अंधियारो,
ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहू सो जात है टारो।
देवन आनि करी विनती तब छांडि दियों रवि कष्ट निवारो,
को नहिं जानत है जब में कपि संकट मोचन नाम तिहारो॥
बालि की त्रास कपीस बसै गिरि जात महाप्रभु पन्थ निहारो,
चौंकि महामुनि शाप दियो तब चाहिए कौन विचार विचारो।
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